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जूते हों खास तो बन जाए बात

फिटनेस के मद्देनजर डिजाइन किए गए स्पोर्ट्स शूज पहनने से व्यायाम करने मेंआसानी होती है। चोटिल होने की आशंका भी नहीं रहती, जानें सौदामिनी पांडेय से व्यायाम करते समय आप जिस तरह के जूते पहनते हैं, उनका सीधा असर आपके पैरों पर पड़ता है।

क्योंकि शरीर का पूरा भार पैरों पर पड़ता है और यही आपके सारे वर्कआउट का आधार होते हैं। इसलिए सही स्पोट्र्स शूज पहनना बेहद जरूरी है। यही वजह भी है कि स्पोट्र्स शूज बनाने वाली कंपनियां इनकी रिसर्च पर अच्छा-खासा समय और संसाधन लगाती हैं।

किसी भी खेल या वर्कआउट में पैरों की मूवमेंट अलग तरह से होती है और वर्कआउट के लिए डिजाइन जूतों में इन बातों का ध्यान रखा जाता है। फिटनेस जरूरतों को समझने के लिए कंपनियां समय व संसाधन दोनों पर काफी खर्च करती हैं।

पहले लोग हर जरूरत के लिए एक ही तरह के जूतों का उपयोग कर लेते थे। रोजमर्रा के कामों और दौडऩे के लिए एक ही तरह के जूतों का इस्तेमाल करते थे, पर अब इस संबंध में जागरूकता बढ़ी है। जिम जाने वाले बहुत से लोग अब जिगजैग डिजाइन वाले जूतों के चक्करों में नहीं पड़ते।

अलग जरूरतें, अलग जूते
*दौडऩे वालों के पैरों को सपोर्ट देने के लिए ज्यादा कुशभनग और बाउंस की जरूरत होती है।
* टेबल टेनिस खेलने वालों के लिए किनारों की ओर के मूवमेंट पर ध्यान देने की जरूरत होती है, वहीं वॉक करने वालों के लिए मजबूत बेस वाले जूतों की जरूरत होती है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
* फिटनेस एक्सपर्ट जोभगदर भसह सलूजा के अनुसार…
* सामान्य जूतों या चप्पलों में स्थिरता नहीं मिल पाती, जिससे चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। एड़ी में लगी चोट का असर कूल्हे तक हो सकता है।

*स्पोर्ट्स शूज के डिजाइन में काफी महीन बातों का ध्यान रखा जाता है, जिससे जमीन पर उनकी ग्रिप अच्छी होती है। अगर अच्छे स्पोर्ट्स शूज पहन रहे हैं तो छलांग लगाने का असर एड़ी तक नहीं आएगा।

*अच्छे स्पोर्ट्स शूज न पहनने से घुटने की ग्रीस तेजी से कम हो जाती है। शुरुआत से ही स्पोर्ट्स शूज पहने जाएं तो उम्र बढऩे के साथ चोट की आशंका से बचा जा सकता है।

*ब्रांडेड जूता खरीदना सुरक्षित रहता है। वो महंगा होता है, पर पैरों के लिए अधिक सुरक्षित होता है।
*स्पोर्ट्स शूज का इस्तेमाल बाहर पहन कर जाने वाले जूतों की तरह न करें। व्यायाम के लिए अलग जूते रखें।

जूते पहनने से जुड़ी इन बातों का ध्यान रखें
1. पुराने जूतों में वर्कआउट न करें। बहुत पुराने जूते होने पर पैरों को उतनी सपोर्ट नहीं मिल पाती, जितने की जरूरत है।
2. स्पोर्ट्स शूज को हर जगह पहन कर न जाएं। जहां तक संभव हो, व्यायाम के लिए अलग जूते रखें।

3. जिम में क्रॉस ट्रेनर शूज इस्तेमाल कर सकते हैं, पर हर तरह के व्यायाम के लिए नहीं। अपने वर्कआउट को ध्यान रख कर जूते खरीदें।

4. विशेषज्ञों का मानना है कि हर 500 मील पर धावकों को जूता बदल लेना चाहिए। हफ्ते में पांच दिन व्यायाम करने वालों को एक साल में जूते बदल देने चाहिए।

5. समय के साथ पैरों का आकार बदलता है। अपने पैरों की बनावट और जरूरत के हिसाब से ही जूते खरीदें।