रोचक जानकारी

अंधविश्वास और उनके पीछे छुपे वैज्ञानिक कारण

बिल्ली का रास्ता काटना

 

पुराने समय में लोग जब व्यापार के लिए एक बैलगाड़ियों से एक शहर से दूसरे शहर जाया करते थे, रात के समय में बिल्ली की आंखे चमकती थी जिससे गाय, बैल और घोड़े डर जाया करते थे। इसलिए थोड़ी देर के लिए यात्रा रोक दी जाती थी। इसी आधार लोग आपस में कहने लगे कि जब बिल्ली गुजरे तो थोड़ी देर के लिए रुक जाना चाहिए और यही बाद में अंधविश्वास बन गया।

रात को नाखून काटना

 

पुराने समय में बिजली की सुविधा नहीं होती थी। ऐसे में शेविंग करने या नाखून काटने पर चोट लगने की संभावना बढ़ जाती थी। इसलिए रात को इन कामों के लिए मना किया जाता था। बाद में लोग ऐसा मानने लगे कि बुरी आत्माएं आकर नाखून और बाले ले जाती हैं इसलिए रात को ये काम नहीं करने चाहिए।

कांच टूटने से

 

पुराने समय में मिरर सस्ते नहीं आते थे और उनकी क्वालिटी भी अच्छी नहीं होती थी। ये आसानी से टूट जाते थे। इनको संभालकर रखा जाए इसलिए कहा जाने लगा कि मिरर का टूटना बेड लक लेकर आता है।

नींबू मिर्च से जुड़े अंधविश्वास

 

ऐसा माना जाता है कि काली मिर्ची और नींबू दुकान के बाहर लटकाने से बिजनेस को किसी की नजर नहीं लगती। जबकि पुराने समय में इसका यूज धागे से नींबू और मिर्ची को बांधकर लटकाने का कारण कीड़ों को दूर भगाना होता था। र्मिच और नींबू से कीड़े पास नहीं आते थे। इसने आगे चलकर अंधविश्वास का रूप ले लिया।

आंख का फकड़ना अच्छा और बुरा

 

आंख के फकड़ने को अच्छा और बुरा शगुन माना जाता है। जबकि आंख सिर्फ आइलिड की मसल्स में एक्टिविटी होने का परिणाम है।

मरने के बाद आंखे खुली नहीं रखना

यह भारत में माना जाने वाला कॉमन अंधविश्वास है। जिसमें माना जाता है कि अगर मरने के बाद किसी भी आंखे खुली रहती हैं तो बुरी आत्मा आंख के सहारे उसमें प्रवेश कर सकती है। जबकि इस आंख को बंद करने का रीजन यह था कि मरा हुआ आदमी ऐसा लगे कि वह आराम से सो रहा है।

छिपकली का गिरना

 

छिपकली में जहर होता है और यह अगर हमारे शरीर के संपर्क में आकर फूड आइटम्स में चली जाए तो हानिकारक हो सकती है। इसलिए इसके गिरने को अच्छा नहीं माना जाता था।

ग्रहण के दौरान बाहर न निकलना

 

भारत में ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। गर्भवती महिलाआें के लिए तो बिलकुल मनाही है। ऐसा होने पर भगवान दंड देते हैं। दरअसल इसके पीछे भी एक साइंटिफिक रीजन छिपा हुआ है। ग्रहण के दौरान हानिकारक पराबैगनी किरणें निकलती हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान निकलने के लिए माना किया जाता था।

शाम के वक्त झाड़ू

शाम के वक्त झाड़ू नहीं लगाने के पीछे भी यही कारण है कि पुराने समय में रात के अंधेरे में बिना बिजली के कुछ दिखाई नहीं देता था।

पीरियड्स

 

इस अंधविश्वास का साइंटिफिक रीजन ये है कि इस दौरान महिलाएं काफी कमजोर और तनावग्रस्त हो जाती हैं। इसलिए उन्हें घर के कामों से दूर रहने को कहा जाता था। जिसने बाद में अंधविश्वास का रूप ले लिया।