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करणी माताजी का चमत्कार अवशय पढ़ें व सभी को बताए

महाराजा गंगासिंह जी करणी माता के प्रति बहुत श्रद्धा रखते थे. श्रद्धा इतनी रखते थे की वे करणी माता की जोत अपनी हथेलियों पर करते थे तथा करणी माता भी उन्हे साक्षात दर्शन देती थी तथा उनकी मदद भी करती थी.

एक बार की बात है अंग्रेजों ने गंगा सिह जी के साथ छल करके उनके सामने भूखा ताकतवर शेर छोड़ दिया. तब गंगासिंह जी ने करणी माता को याद किया और कहा “हे डोकरी लाज राखी” इतना कहने के बाद गंगासिंह जी को नगाड़ों (जैसे आरती हो रही हो) की आवाजें सुनाई दी. गंगा सिह जी एकाग्र होकर शेर को देखने लगे शेर जैसे ही गंगासिंह जी पर झपटा गंगासिंह जी ने उसके दोंनो पैर पकड़ लिए और शेर को चीर के फैंक दिया.

ये दृश्य देखकर अंग्रेजों के रोंगटे खड़े हो गये. रोंगटे ऐसे खड़े हुए की अंग्रेजों की सर पर पहनी हुई टोपियां तक खङ़ी हो गई. सर्दियों का वक्त था अंग्रेजों के पसीने छूट गये, पैर कांपने लगे और चुड़ियां खनकने की आवाजें सुनाई देने लगी. अंग्रेजों को ऐसा लगा की जैसे गंगासिह जी के साथ कोई औरत भी है. ये औरत साक्षात करणी माता ही थी जो गंगासिह जी की मदद कर रही थी. ये बात श्री करणी माता के गीतों में भी गाई जाती है-


“गंग भूप री रही मदद मै, अंग्रेजां मै जाय
अंग्रेजां तो तोत रचायो, सुतेड़ो शेर जगाय
सिंह गरज कर आयो भूप पर, हाथळ रोकी जाय
गंगासिह जी रो मान बढ़ायो, सिहड़ै ने दियो चीर भगाय”

जय माँ करणी

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Prakash Jain

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