धर्म और जीवन शैली

इसलिए दिवाली पर करते हैं लक्ष्मी, गणेश और कुबेर का पूजन

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम के लंका विजयोपरांत अयोध्या आने पर वहां की जनता ने घी के दीपक जलाकर श्रीराम का स्‍वागत किया। तभी से दीपावली मनाए जाने की शुरुआत हुई। मगर, इस पर्व पर विष्णुप्रिया लक्ष्मी, गणपति और कुबेर जी का ही पूजन क्यों होता है, आइए जानते हैं महत्व …

हिंदु धर्म की परंपराओं के अनुसार, ऋद्धि-सिद्धि के अधिपति गणपति और धन-संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी भगवान विष्णु की चंचल स्‍वभाव की पत्नी लक्ष्मी हैं। इसी कारण लक्ष्‍मी को चंचला भी कहते हैं। इनकी अनुकंपा प्राप्त हो जाने पर व्‍यक्‍ित का जीवन धन-धान्‍य से परिपूर्ण हो जाता है।

लक्ष्‍मी किसी व्‍यक्‍ित के पास या किसी भी स्थान पर लंबे समय तक नहीं टिकती हैं। इसलिए हर गृहस्थ इनकी स्थापना ऐसे मुहूर्त में करनी चाहिए, ताकि लक्ष्मी उनके यहां स्थिर होकर रहें। इसलिए दिवाली के दिन उनका पूजन विशेष रूप से किया जाता है।

मां लक्ष्‍मी के साथ भगवान गणेश भी मुहूर्त रूप में विद्यमान रहते हैं। इसीलिए लक्ष्‍मी-गणेश का पूजन साथ में किया जाता है। वहीं, धन के देवता कुबेरजी को भगवान शिव का अधिपति माना जाता है। इसलिए लक्ष्मी प्राप्ति के लिए धन-कुबेर जीकी आराधना दीवाली पर जरूर की जानी चाहिए।

 

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Shiv Kumar

I am a freelance writer and blogger that specializes in tips and tricks. I studied at the University of Delhi and am now on the Delhi,India. I frequently blog about writing tips to help students do better on their work.

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