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शुभ तिथि है दशहरा लेकिन भूलकर भी न करें ये काम

नवरात्र के इस पवित्र काल के तत्काल बाद सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली महातिथि विजय दशमी मनाई जाएगी। एक ओर दशहरे के दिन क्षत्रिय-क्षत्रपों के यहां अस्त्र-शस्त्रों के पूजन की शास्त्रीय राजपरंपरा है तो दूसरी ओर अपराजिता देवी के रूप में शमी वृक्ष (खेजड़ी) में अग्नि देवता की आराधना।

नवरात्र के नौ दिनों में शक्ति संग्रह के बाद मन में बसे काम, क्रोध, मद व लोभ के प्रतीक व मानवता के महानाशक दुराचारी रावण को मन से सदा के लिए मारने का पवित्र दिन है-विजय दशमी। यानी मन के अवगुणों को दहन करने का है यह शुभ दिन।

क्यों सर्वश्रेष्ठ पर्व है विजय दशमी

दशहरा यानी विजय दशमी अनेक मांगलिक कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसे ज्योतिष शास्त्र में अबूझ भी माना गया है।

संस्कार युक्त कार्य यथा-नामकरण, अन्नप्राशन, चौलकर्म संस्कार अर्थात मुंडन संस्कार, कर्णवेध, यज्ञोपवीत व वेदारंभ आदि संस्कार करने के लिए अत्यंत श्रेष्ठ दिन माना जाता है।

यह जरूर ध्यान रखने की बात है कि अबूझ होने पर भी इस दिन विवाह संस्कार भूलकर भी नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में भी विजय दशमी को श्रेष्ठ तिथि माना गया है।

 

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Ashok Kumar

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