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माला में 108 मोती ही क्यों?

भगवान का मंत्र जाप करने के लिये हमें माला की आवश्‍यकता पड़ती है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि मंत्र जाप करने की माला में 108 दाने ही क्‍यों होते हैं? इसके पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।
कहते हैं कि बिना माला के मंत्र जाप का कोई फल प्राप्‍त नहीं होता। हमारे शास्‍त्रों के अनुसार, माला के बिना किया गया जप संख्‍याहीन होता है और ऐसे जप का पूरा फल प्राप्‍त नहीं हो पाता। इसलिए मंत्र जप करते समय माला का उपयोग अवश्य करना चाहिए।
इसी तरह दूसरी मान्‍यता के अनुसार, माला के 108 मोती और सूर्य की कलाओं का संबंध है। एक वर्ष में सूर्य लगभग 216000 कलाएं बदलता है। सूर्य वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है। इस तरह सूर्य छह माह की एक स्थिति में 108000 बार कलाएं बदलता है। इसी संख्या 108000 से अंतिम तीन शून्य हटा कर माला के 108 मोती निर्धारित किए गए हैं। माला का हर एक मोती सूर्य की हर एक कला का प्रतीक है। सूर्य ही एकमात्र साक्षात दिखने वाले भगवान हैं। भगवान सूर्य मनुष्य को तेजस्वी बनाते हैं और समाज में मान-सम्मान दिलाते हैं।
ज्योतिष के अनुसार, ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 राशियों में 9 ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु घूमते रहते हैं। अगर ग्रहों की संख्या 9 और राशियों की संख्या 12 का गुणा किया जाए तो संख्या 108 मिलती है। इसलिए 108 मोतियों की माला पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक मानी जाती है।

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Ashok Kumar

I am a freelance writer and blogger that specializes in Tech and gadgets. I studied at the University of Ajmer and am now on theDelhi. I frequently blog about writing tips to help students do better on their work.

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