रोचक जानकारी

आचार्य महाप्रज्ञ की ये 2 कथाएं बदल देंगी आपके जीवन की दिशा

1.आलस्य का चित्रमालिक ने नए नौकर से कहा- ये पैसे लो, बाजार से सब्जी ले आओ। नौकर- मालिक मैं नया-नया आया हूं, बाजार का रास्ता नहीं जानता। मालिक बाजार जाकर सब्जी ले आया और नौकर सेे कहा- सब्जी तैयार है।

रसोई बनाओ।नौकर- मालिक, मैं रसोई बनाना नहीं जानता।मालिक ने रसोई बना ली और नौकर से कहा- आओ, भोजन कर लो।नौकर- मालिक, दो बार मनाही करना अच्छा नहीं है। इतना कहकर भोजन करने बैठ गया।आलसी मनोवृति के चित्र अनगिनत हैं।

असफलता के कैनवास पर उनकी रेखाएं और रंग स्वयं मुखर होते हैं और यही पिछड़ने की वजह बनती है।

2. दोषारोपणएक महिला ने दूसरी महिला से पूछा- कहो, आजकल कैसा चल रहा है? सब ठीक तो है ना!वह महिला बोली- कर्मों का फल भोग रही हूं।
इस नारकीय जीवन से न जाने कब छुटकारा मिलेगा।पहली महिला- कर्मों को दोष क्यों देती हो?दूसरी महिला- कर्मों को दोष न दूं तो किसे दूं? यह कर्मों का ही योग है जब मैं बहू थी तो सास अच्छी नहीं मिली और अब जब सास बन गई तो अच्छी बहू का सुख नसीब में नहीं।

मनुष्य अपनी कमियों को नहीं देखता। वह दूसरों की कमियों को देखने में रस लेता है। यह दोषारोपण की प्रवृत्ति विकास में बाधक बनती है। इसी वजह से मनुष्य आगे नहीं बढ़ पाता और विकास के बजाए पतन की ओर अग्रसर रहता है।

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Prakash Jain

I am love to write on Dharma , Jain and Temples . A little piece into someone's thought or personality. I have been both modeling and taking pictures for either forever, or nine years. It's what I love. I write almost every day.

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