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स्मार्ट सिटी क्या है ? व दुनिया की 5 बेह्तरीन स्मार्ट सिटी

आइए जानते हैं ये स्मार्ट सिटी होती क्या है।
स्मार्ट सिटी की ऐसी कोई परिभाषा नहीं है। अलग-अलग शहर और देश के हिसाब से इसकी परिभाषा बदलती रहती है। यूरोप में इसके मायने अलग हैं तो भारत में अलग हैं। वैसे ही लोगों के बीच भी इसकी राय अलग-अलग रहती है। स्मार्ट सिटी में ये सारी चीजें होनी चाहिए:

1- एक शहर जहां की जलवायु शुद्ध हो, लोग खुली हवा में सांस ले सकें।
2- बिजली-पानी की सप्लाई 24 घंटे सुचारू हो।
3- दिनभर लोगों को ट्रैफिक में न जूझना पड़े, सार्वजनिक यातायात उपलब्ध हो जो विश्व स्तरीय हों।
4- बुनियादी सुविधाएं जैसे किसी चीज की बुकिंग, बिल जमा करना, आदि बेहद सरल हो।
5- सड़कें, इमारतें, शापिंग माल, सिनेप्लैक्स सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से बने हों।
6- झुग्गी-बस्तियां न हों। कुछ ऐसा शहर दिखे जहां लोगों के रहन-सहन में समानता दिखे।
7- सड़कों पर कूड़ा न दिखे। सड़कें एकदम साफ हों।
8- गु़ड गवर्नेंस हो, विशेषकर ई-गवर्नेंस औऱ लोगों को ज्यादा से ज्यादा शामिल करना।
9- महिलाओं, बच्चें और बुजुर्गों की सुरक्षा हो।
10- स्वास्थ्य और शिक्षा उच्च दर्जे की हो।

स्मार्ट सिटी का मकसद:
1-शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना
2- स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना
3- परिवहन व्यवस्था को बेहतरीन बनाना
4- शहरों की छवि खराब करती झुग्गी झोपड़ियों को हटाना
5- झुग्गी में रहने वाले लोगों को वैकल्पिक सुविधा मुहैया कराना
6- शहरी संसाधनों, स्रोतों और बुनियादी संरचनाओं का सक्षम ढंग से विकास करना
7- 2022 तक सभी को आवास उपलबध कराना

ये हैं दुनिया की 5 बेह्तरीन स्मार्ट सिटी

मेडलिन, आने-जाने के लिए रोप-वे
कोलंबिया का यह शहर मेडलिन कभी दुनिया में सबसे ज्यादा क्राइम वाला शहर हुआ करता था। लेकिन आज यह अपनी अनूठी व्यवस्था के कारण जाना जाता है। यहां के निवासी आने- जाने के लिए रोप-वे का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, जगह-जगह विशाल एस्केलेटर्स लगाए गए हैं। इससे पहले जहां आने-जाने में घंटों लग जाते थे, अब वहां मिनटों में सफर पूरा हो जाता है।

ग्रीन सिटी ऑफ वर्ल्ड

कनाडा के वैंकूवर शहर को वर्ष 2020 तक दुनिया का ग्रीनेस्ट सिटी बनाने का लक्ष्य है। यह शहर रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करता है। यहां करीब 75 फीसदी बिजली की सप्लाई रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए की जाती है। शहर ने अपनी पानी की जरूरत को 20 फीसदी तक घटा लिया है। इसके अलावा, 41 फीसदी लोग या तो पैदल चलते हैं या फिर साइकिल पर।
रियो डी जेनेरियो
ब्राजील का सबसे बड़े शहर रियो में मौसम की भविष्यवाणी का ऐसा सिस्टम लागू किया गया है कि वहां एक-एक किलोमीटर के फासले पर अगर मौसम बदलता है तो नागरिकों को उनके स्मार्ट फोन पर जानकारी मिल जाती है। साथ ही, स्थानीय अधिकारी भी सचेत हो जाते हैं कि कहां बारिश हो सकती है। इस तरह का वेदर प्रिडिक्शन सिस्टम अपनाने वाला यह दुनिया का पहला शहर है।
लंदन
ईस्ट लंदन के एक डाटा सेंटर से प्रोजेक्ट टेलीहाउस की शुरुआत की गई है। इसके तहत वेस्ट को रीसाइकिल करके एनर्जी पैदा की जाती है, जिसका फायदा आसपास के लगभग 90 हजार घरों को मिलता है। टेलीहाउस बिल्डिंग के कूलिंग सिस्टम के जरिए इस एनर्जी को एक्सपोर्ट किया जाता है, जिसका उपयोग लोग पानी गर्म करने या हीटिंग से जुड़े अन्य कामों के लिए कर सकते हैं।
साइकिल फ्रेंडली सिटी
यूरोपीय देश डेनमार्क की कोपेनहेगन सिटी दुनिया की सबसे अधिक साइकिल फ्रेंडली सिटी है। यहां की कुल आबादी करीब छह लाख है, जिसमें से एक-तिहाई लोगों के परिवहन का मुख्य साधन साइकिल है। यहां साइकिल को बढ़ावा देने के लिए खास रास्ते बनाए गए हैं। इन्हें ग्रीन-वे कहा जाता है। ट्रांसपोर्ट के अन्य साधनों के लिए यहां अलग रोड हैं। यहां 10 मील का पहला साइकिल हाईवे भी बन रहा है। गौरतलब है कि पूरे डेनमार्क में साइकिल रूट्स का नेटवर्क करीब 7000 किमी में फैला हुआ है।

About the author

Prakhar

I am a lover of photos and words; written, spoken Health and Dharma. A little piece into someone's thought or personality. It's what I love. I write almost every day. Here is where I'll show you what I want to share, though be aware that I write mostly stream-of-consciousness, and may contradict myself.

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