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रुपये को लेकर कुछ ऐसे तथ्य जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए

हम जानते हैं कि हमारे देश में RBI नाम की संस्था है जो नोटों और सिक्कों को जारी करने का काम करती है. और हम सभी इस फैक्ट के साथ-साथ रुपये से बहुत प्रेम करते हैं. मगर क्या हम ख़ुद के द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले रुपयों के बारे में कुछ छिपी-अनछिपी बातें जानते हैं? नहीं न! तो ये आर्टिकल ख़ास आपके लिए ही है जो रुपये के विषय में आपका ज्ञानवर्धन करेगा.

1. 5,000 और 10,000 रुपये के नोट 1954 से 1978 के बीच हिन्दुस्तान में प्रचलित थे.

2. आज़ादी के बाद लम्बे समय तक पाकिस्तान भारतीय रुपयों को इस्तेमाल करता रहा, जब तक कि उन्होंने पर्याप्त मात्रा में नोट नहीं छाप लिए.

3. एक रुपये का नोट वित्त मंत्रालय जारी करता है, जिस पर वित्त मंत्रालय के सचिव के हस्ताक्षर होते हैं.

4. बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में रुपया- अदन, ओमान, कुवैत, बहरीन, कतर, युगांडा, त्रुसियन राज्य, केन्या, शेशिलिस और मॉरीशस जैसे देशों की मुद्रा हुआ करता था

5. नेपाल में Rs.500 और Rs.1,000 के नोट बैन है.

6. एक समय पर Rs.5 के सिक्कों को बांग्लादेश स्मगल किया करता था, जिससे वे रेज़र ब्लेड बनाया करता था.

7. कम्प्यूटर पर Rs. टाइप करने के लिए ‘Ctrl+Shift+$’ के बटन को एक साथ दबावें.

8. Rs.10 के निर्माण में Rs.6.10 का खर्च आता है.

9. अतीत में सिक्कों की कमी के कारण RBI विदेश में भी सिक्कों के ढालने का काम करवाता था.

10. किसी भी सिक्के की ढलाई को जानने के लिए आपको उस पर छपे हुए वर्ष के नीचे देखने की जरूरत है और वहां छपे हुए निशानों को देख कर आप इस बात को जान सकते हैं कि वो सिक्का कहां ढला है.

12. अगर आपके पास फटा नोट है, या फ़िर फटे हुए नोट का 51 % हिस्सा है तो आप इस नोट को बैंक में नए नोट से बदल सकते हैं.

13. सन् 1917 में रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत था. Rs.1 = 13 अमरीकी $. है न हैरानी वाली बात!

14. सारे नोट ख़ुद में भारतीयता की छवि को समेटे होते हैं. जैसे कि 20 Rs. अंडमान द्वीप की छवि अंकित है.

15. एक समय पर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए Rs.0 का नोट 5thpillar नाम की गैर सरकारी संस्था द्वारा जारी किए गए थे.

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Prakhar

I am a lover of photos and words; written, spoken Health and Dharma. A little piece into someone's thought or personality. It's what I love. I write almost every day. Here is where I'll show you what I want to share, though be aware that I write mostly stream-of-consciousness, and may contradict myself.

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